Antim Yatra : गुजारिश
कितना अच्छा हुआ हम नजरो से दूर हो गए तन की दूरी बढ़ी और मन से करीब हो गए । तेरी एक झलक को यहाँ तरसती थी आँखे मनचाहे रूप मे सजाती, अब मेरी बंद आँखे। पहले बातों की बात बनती बात बनते बनते मन बहलता अब हवाओं से तेरी बात कहते । कई बार सहमी होंगी…
